आजकल ई-कॉमर्स का बिज़नेस बहुत ही प्रचलित हो गया है। इसमें सफलता पाने के लिए बहुत सी रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं, लेकिन बहुत से नए व्यापारी इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण समस्या का सामना करते हैं, और वह है – आरटीओ (Return to origin)। RTO का मतलब है कि ग्राहक ने जो प्रोडक्ट मंगवाया, वह उसे रिसीव नहीं करता और वह प्रोडक्ट वापस विक्रेता के पास लौट आता है। यह समस्या आजकल ई-कॉमर्स व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
आइए जानते हैं एक ऐसी कहानी, जिसमें हम देखेंगे कि कैसे एक नवोदित ई-कॉमर्स व्यापारी ने अपने बिज़नेस को एक नई दिशा दी और आरटीओ को कम कर अपने व्यापार को प्रॉफिटेबल बनाने में सफलता पाई।
ऋषभ की सफलता की कहानी
ऋषभ, जो लुधियाना का रहने वाला एक 22 साल का युवा है, ने कुछ महीने पहले अपनी वॉचेस की ई-कॉमर्स वेबसाइट शुरू की थी। शुरुआत में सब कुछ सही चल रहा था। 3 महीने के भीतर ही, उसे 8 लाख रुपये से ज्यादा के ऑर्डर्स मिले थे। उसने अपनी वेबसाइट पर 4 दिन के अंदर ही प्रोडक्ट अपलोड किए और लाइव किया, जिसके बाद ऑर्डर्स भी आने शुरू हो गए थे। लेकिन जब उसे अपने बिज़नेस का मुनाफा देखने की उम्मीद थी, तो एक बडी समस्या सामने आई।
उसके अधिकांश ऑर्डर्स रिटर्न हो रहे थे, यानी ग्राहक ने प्रोडक्ट को रिसीव ही नहीं किया और वह वापस लौट आ रहा था। इसके बावजूद, वह अच्छी संख्या में ऑर्डर हासिल कर रहा था, लेकिन कमाई नहीं हो रही थी। यह समस्या केवल ऋषभ के साथ नहीं थी, बल्कि यह एक आम समस्या है जो ई-कॉमर्स व्यापारियों के सामने आती है।
ई-कॉमर्स बिज़नेस में आरटीओ की समस्या
RTO के कारण कई बार व्यापारियों का पूरा निवेश बेकार हो जाता है। उदाहरण के लिए, एक व्यापारी ने अपने उत्पाद को ग्राहक के पास भेजने के लिए ऐड्स में पैसा खर्च किया, शिपिंग का खर्चा उठाया, वेबसाइट पर निवेश किया, लेकिन ग्राहक ने प्रोडक्ट का रिसीव ही नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप, वह प्रोडक्ट वापस आ जाता है और व्यापारी का सारा पैसा डूब जाता है।
RTO के कई कारण होते हैं:
1. ग्राहक का इंटरेस्ट कम होना – कई बार ग्राहक ने प्रोडक्ट देखा और ऑर्डर किया, लेकिन जैसे-जैसे प्रोडक्ट डिलीवरी तक पहुंचता है, ग्राहक का इंटरेस्ट कम हो जाता है।
2. गलत पता या शॉर्ट एड्रेस – ग्राहक ने गलत पता दिया होता है, जिससे डिलीवरी में समस्या आती है और प्रोडक्ट वापस आ जाता है।
3. कस्टमर की अवेयरनेस की कमी – कई बार कस्टमर को सही ट्रैकिंग जानकारी नहीं मिलती, जिससे वह प्रोडक्ट रिसीव करने में चूक जाता है।
यह समस्या न केवल ऋषभ के साथ थी, बल्कि ज्यादातर नए ई-कॉमर्स व्यापारियों के साथ यह होती है। इसी कारण से, व्यवसायी अपनी मेहनत और पैसे का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाते हैं।
समाधान – AI की मदद से RTO कम करना
अब बात करते हैं उस उपाय की, जिसने ऋषभ की तरह कई अन्य व्यापारियों की मदद की है। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से आज इस समस्या को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से, आई थिंक लॉजिस्टिक जैसी कंपनियां इस काम में मदद करती हैं। यह कंपनी ई-कॉमर्स व्यापारियों को अपने ग्राहकों से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए तकनीकी समाधान प्रदान करती है, जिससे आरटीओ कम किया जा सकता है।
आई थिंक लॉजिस्टिक ने एक स्मार्ट सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जिसका नाम है connect plus। यह टूल स्वचालित रूप से ग्राहकों को उनके ऑर्डर की स्थिति के बारे में सूचित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि ग्राहक का इंटरेस्ट प्रोडक्ट में बना रहे और वह रिसीव करने के लिए तैयार रहे।
कनेक्ट प्लस का कार्यप्रणाली
यह सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक कस्टमर को कंफर्मेशन मैसेज भेजता है जब वह ऑर्डर करता है, और फिर उसे एक और मैसेज भेजता है जिसमें उसे अपने एड्रेस को कंफर्म करने का ऑप्शन मिलता है। अगर ग्राहक सीओडी (कैश ऑन डिलीवरी) ऑर्डर करता है, तो उसे प्रीपेड में बदलने का एक ऑफर दिया जाता है। प्रीपेड ऑर्डर में आरटीओ रेट कम होते हैं, और व्यापारियों को भुगतान भी पहले मिल जाता है, जिससे उनके लिए यह फायदे का सौदा साबित होता है।
इस तरह, कनेक्ट प्लस और अन्य एआई टूल्स की मदद से व्यापारियों को अपने ग्राहकों से बेहतर संवाद करने और आरटीओ को कम करने में मदद मिलती है।
विजम – रियल टाइम ट्रैकिंग
आई थिंक लॉजिस्टिक का एक और महत्वपूर्ण फीचर है, विजम। यह टूल व्यापारियों को अपने ग्राहकों के ऑर्डर्स की रियल टाइम ट्रैकिंग जानकारी देता है। इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक को हमेशा अपने ऑर्डर की स्थिति का पता चलता रहता है, जिससे वह प्रोडक्ट को रिसीव करने के लिए तैयार रहता है। इस सुविधा से आरटीओ में और भी कमी आती है।
प्रचार-प्रसार के लिए सही ऐड्स का उपयोग
आरटीओ को कम करने के लिए सही ऐड्स चलाना भी महत्वपूर्ण है। व्यापारी अगर बहुत व्यापक टारगेटिंग करते हैं तो वे गलत ऑर्डर्स पा सकते हैं, जो आरटीओ में बदल सकते हैं। इसके बजाय, व्यापारियों को अपनी टारगेटिंग को और अधिक संकुचित रखना चाहिए, ताकि उन्हें सिर्फ वही ग्राहक मिले जो वास्तव में प्रोडक्ट में रुचि रखते हों। इस प्रकार, उनकी ऐड्स की लागत भी बेहतर तरीके से खर्च होती है और आरटीओ कम होते हैं।
निष्कर्ष
ऋषभ की कहानी यह दर्शाती है कि ई-कॉमर्स बिज़नेस को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत और सही रणनीति की आवश्यकता होती है। आरटीओ एक बड़ी समस्या हो सकती है, लेकिन एआई टूल्स और स्मार्ट सॉफ्टवेयर की मदद से इसे कम किया जा सकता है। सही कस्टमर संवाद और प्रोडक्ट के प्रति उनकी रुचि को बनाए रखने के उपायों से आप अपने ई-कॉमर्स बिज़नेस को प्रॉफिटेबल बना सकते हैं।
यदि आप भी ई-कॉमर्स बिज़नेस शुरू करने जा रहे हैं या अपनी वेबसाइट को अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, तो एआई टूल्स का उपयोग करके आप भी ऋषभ की तरह सफलता प्राप्त कर सकते हैं।